२४नवम्बर २०११
आज दो दिन बाद डायरी लिख रहा हूँ . २२नवम्बर सामान्य ही व्यतीत हुवा . दिन भर आराम ही करता रहा . घर में मन कुछ लग नहीं रहा था . एक गाजियाबाद पर आधारित दैनिक जागरण के विज्ञापन के अनुसार एक गीत लिखा . इसे समाचार पत्र की मेल पर भेजना है . गीत इस प्रकार है ___
हिंडन तीरे गंगा नीरे गाजियाबाद नगर स्थलम
शुभ तकनीक उच्च संगम विशाल औद्योगिकपुरम
कवि राज शास्त्री वैशाली वसुंधराविजय इंदिरापुरम
पटेल गोविन्द प्रताप नेहरु तुराब स्वर्ण ज्यन्तिपुरम
परिधि सिहानी डासना दिल्ली जवाहर नवयुग द्वारम
शुभम स्वस्ति मंगल शांति पूर्ण दूधेश्वर अभिरामम
मोदी मुराद मंगल शम्भू ऋषभांचल सूर्य प्रकाशम
क्रांति का अग्रदूत शरणागत सदा सर्व सुख निधानम
दैनिक जागरण _ मेरा शहर मेरा गीत _ गाजियाबाद
सूर्य प्रकाश विद्यालंकार , के एच - 157 कविनगर , गाजियाबाद . 09810490366 , spvidyalankar@gmail.com
यह गीत मैंने आज जागरण की मेल पर भेज दिया . मुझसे भेजा नहीं जा रहा था की फाइल अथवा फोल्डर नहीं बन पा रहा था . मैंने दोपहर को सोनू विवेकानंद नगर फोन किया . पर उसका फोन नहीं मिल पाया . फिर मैंने पारस जैन के एच १६१ को फोन किया , पर वह कालेज में था . उसने कहा कि वह एक घंटे में घर आ जायेगा . जब पारस आया तभी सोनू का फोन भी आ गया . पर मैंने धन्यवाद देते हुवे कहा कि अब तो पारस आ गया है . यदि आवश्यकता हुयी तो फोन कर दूंगा . पारस के सहयोग से मैंने जागरण को `cityanthem@del.jagran.com ` पर मेल कर दिया . साथ ही पुष्टि के लिए शाम को भी पुन: मेल किया .
शाम को थोड़ी देर आराम किया . आज बीना का गुरुतेग बहादुर दिवस के कारण अवकाश था . मैं योग से १० बजे बाद आया . रास्ते से सब्जी , नमकीन पनीर एवं सफल मटर लेते हुवे आया . आज श्री एन.के . जैन सी ए को जन्म-दिवस की बधाई दी . आज का योग का कार्यक्रम उन्होंने करवाया . णमोकार मन्त्र एवं चुम्बकीय साधना करवाई . सुशील जी के पोते के जन्म- दिवस की उन्हें फोन से बधाई दी . वे मेरठ में एक शादी में गये हुवे थे . बाद में श्री आर के जैन से ऐसे ही बहुत देर तक पारिवारिक बातें करता रहा . उनके साथ बातें करना बहुत ही अच्छा लगता है .
आजकल घिल्डियाल सर्दी के वजह से नहीं आ रहे हैं . उन्हें जल्दी सर्दी लग जाती है . अभी तो इतनी सर्दी पड़नी भी शुरू नहीं हुयी है . पर सबका अपना-अपना स्वभाव होता है . इस विषय में कुछ कहा नहीं जा सकता .
आजकल आयुष्मान कुछ परेशान-सा है . उसे मानसिक चिंता बहुत हो जाती है . उसका स्वभाव ही कुछ ऐसा है . वह सोचता बहुत है और चिंता ज्यादा करता है . आज का दिन कुछ विशेष रूप से चिंतनीय है . स्मृति की कुछ परतें खुल कर सामने आ जाती हैं . पर क्या किया जा सकता है . सबका अपना-अपना स्वभाव और उसके अनुसार विवशताएँ भी होती हैं . सबके अपने कर्म उसके साथ होते हैं और वे उसी अनुसार फल देते हैं . फल मीठे , खट्टे या कड़वे भी हो सकते हैं . यही कर्म , भोग एवं फल का स्वरूप है .
मुझे तो स्वयम अपने आप को व्यस्त रखने का प्रयास करना हो गा . व्यस्त रहने में ही असली मजा है . फिर भी कभी-कभी निराशा घेर ही लेती है . पर उस निराशा से कोई लाभ भी नहीं है .