बुधवार, 4 जनवरी 2012

२८ नवम्बर 11


25 नवंबर 11 


आज शम्भू दयाल कालेज के शिक्षा-विभाग में एक सेमिनार था . मुझे मुख्य- अतिथि के रूप में बुलवाया गया था . प्रो . एन.पी . सिंह अब प्राचार्य हैं , वहां जा कर अब पहले से अच्छा लगता है . प्राचार्य अब बहुत सम्मान करते हैं . सेमिनार का विषय ' विद्यार्थियों के नैतिक विकास में शिक्षक की भूमिका ' था . सेमिनार का समय 10 बजे का था . पर अध्यक्ष डा. गोस्वामी के कारण विलम्ब 11 . 30 तक शुरू हो पाया . प्रतीक्षा करने में बहुत ही कष्ट हुवा . सेमिनार का संचालन शिक्षा-विभाग की अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी गोयल ने किया . उनका अंग्रेजी एवं हिंदी दोनों पर ही समान अधिकार है . संचालन अच्छा किया . 

शिक्षा विभाग की छात्रों का प्रस्तुतिकरण अच्छा था . इसमें लवली कटारिया . विदूषी सिंह , भावना मित्तल , नंदिनी बंसल , भारत , स्वीटी , सबा रिजवी , निशा वर्मा , अमित कुमार , सोनिका आदि ने भाग लिया . सार यही रहा कि नैतिक मूल्य ही आदर्श मूल्य हैं . भ्रष्टाचार से मुक्ति ही नैतिकता है . विद्या ददाति विनयं ... , स्वार्थ नहीं अपितु सर्वार्थ पर ही ध्यान देना है . स्व-प्रतिबिम्ब ही आदर्श है . आदर्श दर्पण ही है . ' humanity the base of morallity ' . साथ ही व्यवहारी ज्ञान पर ही बल देना चाहिए . ' be positive . be practical and be pations . ' पुरुष से पुरुषोत्तम बनने ने की प्रक्रिया ही नैतिकता है . 

शास्वत एवं ऐच्छिक मूल्य ही नैतिक मूल्य की श्रेणी में आ सकते हैं . जीवन से सम्बद्ध व्यावहारिकता का विशेष महत्त्व होता है . इसी पर बल देते हुवे अध्यापिकाओं ने विचार रखे . डॉ. मीनाक्षी गोयल . डा.नीरजा सिंह , डॉ . अनुराधा शर्मा , डा दीपिका , डॉ. शैलजा शर्मा , डा. बीना सिंह , डा. निहारिका गर्ग आदि के विचार उत्तम रहे . मंच से श्रीमती राजेश गुप्ता , डा. अमीता सोलंकी , प्राचार्य एन.पी. सिंह , डा गोस्वामी एवं स्वयं मैंने अपने विचार रखे . सेमिनार कुल मिलाकर बहुत ही अच्छा रहा . अंत में सभी को प्रतीक चिह्न मिले . मैंने अपना प्रतीक चिह्न शिक्षा विभाग की अध्यक्ष डा. मीनाक्षी गोयल को विभाग में रखने के लिए दे दिया . मेरे साथ मेरे योग -साथी श्री राजेन्द्र कुमार जैन ने भी भाग लिया . उनका भी कालेज से पूरा सम्मान किया गया . 

26 नवम्बर 11 

आज कालेज में श्री संतोष कुमार का पीएचडी का वायवा था . प्रो. पवन कुमार अग्रवाल , लखनऊ विश्वविद्यालय परीक्षक थे . वे प्रात: 7 बजे आ गये थे . घर पर साथ में नाश्ता किया और वे 1 बजे मेरठ छात्र के साथ मेरठ चले गये . दिन भर ऐसे ही टाइम पास करता रहा . रात को कम्प्यूटर पर देर हो गयी और देर से नीं खुली . 





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